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Announcement
Research Article

अभिनव भारत के निर्माण में सरदार बल्लभ भाई पटेल की भूमिका : एक ऐतिहासिक एवं विश्लेष्णात्मक अध्ययन

1. vijay Kumar Shukla 2. Baijnath Pal

Abstract

सारांश
भारत का स्वतंत्रता आंदोलन केवल औपनिवेशिक शासन से मुक्ति का संघर्ष नहीं थाए बल्कि स्वतंत्रता के बाद एक आधुनिक, एकीकृत एवं लोकतांत्रिक राष्ट्र के निर्माण की प्रक्रिया भी था। 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत के सामने राजनीतिक एकीकरणए देशी रियासतों का विलयए प्रशासनिक पुनर्गठनए आंतरिक सुरक्षा तथा साम्प्रदायिक तनाव जैसी अनेक चुनौतियाँ थीं। ऐसी परिस्थितियों में सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्र भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के रूप में राष्ट्रीय एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वीण् पीण् मेनन तथा राज्यों के विभाग के सहयोग से उन्होंने रियासतों के शासकों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें भारतीय संघ में सम्मिलित कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। जूनागढ़ और हैदराबाद जैसे मामलों में परिस्थितियाँ अधिक जटिल रहीं।
पटेल का योगदान केवल रियासतों के राजनीतिक एकीकरण तक सीमित नहीं था। संविधान सभा में उन्होंने मौलिक अधिकारोंए अल्पसंख्यकों तथा आदिवासी एवं बहिष्कृत क्षेत्रों से संबंधित सलाहकार समिति के अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सक्षम एवं अखिल भारतीय दृष्टिकोण वाली प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकता पर भी बल दिया। प्रस्तुत अध्ययन ऐतिहासिक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति पर आधारित है तथा प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों के माध्यम से पटेल के राजनीतिकए प्रशासनिक एवं संवैधानिक योगदान का अध्ययन करता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि आधुनिक भारत के राजनीतिक एकीकरण, प्रशासनिक स्थिरताए संवैधानिक विकास और राष्ट्रीय अखंडता के निर्माण में सरदार पटेल का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

Keywords

प्रमुख शब्दः सरदार वल्लभभाई पटेल, राष्ट्र.निर्माण, राष्ट्रीय एकता, रियासतों का एकीकरण, राष्ट्रीय अखंडता, संविधान सभा, प्रशासनिक एकीकरण, अखिल भारतीय सेवाएँ।

Author Affiliations

1. शोध छात्र , राजनीतिशास्त्र , लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कालेज, गोंडा
2. शोध निर्देशक , राजनीतिशास्त्र , लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कालेज, गोंडा